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भारत के इस किले में मिला अंग्रेजों के जमाने का बनाया 100 साल पुराना रास्ता

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नई दिल्ली (जेएनएन)। पुराना किला में नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) द्वारा कराए जा रहे विकास कार्य के दौरान अंग्रेजों के जमाने का रास्ता मिला है। बताया जा रहा है कि यह एक सौ साल से भी पुराना है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) इसे संरक्षित करेगा।

बता दें कि पुराना किला के गेट पर लंबे समय से कंक्रीट की सड़क बनी हुई थी। इसे बार-बार बनाया गया था जिससे सड़क कंक्रीट की मोटी परत बन चुकी थी। सड़क को तोड़ने के लिए जेसीबी चलाई जा रही है। योजना के अनुसार सड़क को तोड़ कर किला के गेट पर उसी तरह का रास्ता बनाया जाना था जो किला को बनाए जाने के समय था। सड़क को तोड़ा गया तो नीचे से एक रास्ता निकल आया।

एएसआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एक सौ साल पुरानी एक फोटो में इसी तरह का रास्ता है जो मिला है। उन्होंने बताया कि जब इस किले को बनाया गया था, उस समय भी किला के गेट पर सड़क नहीं थी रास्ता ही था। इसलिए किला के गेट पर रास्ता ही रखा जाएगा।

बता दें कि पुराना किला में एनबीसीसी विभिन्न प्रकार का कार्य करा रहा है। जिसमें किला के गेट के पास झील का पुनर्विकास से लेकर अन्य तरह के कार्य भी शामिल हैं। इसे 2 अक्टूबर से पहले पूरा कर लिया जाएगा।

यहां पर बता दें कि देश की राजधानी दिल्ली में स्थित पुराना किला एक जानकारीपरक पर्यटक स्थल है। बताया जाता है कि दिल्ली के सभी किलों में सबसे पुराना होने के साथ-साथ यह किला इन्द्रप्रस्थ नामक स्थान पर स्थित है जो कि कभी एक विख्यात शहर था।

मान्यताओं के अनुसार, इस पुराने किले को यमुना नदी के किनारे पर महाभारत काल  का माना जाता है और यह 5000 साल से भी अधिक पुराना है। कहा तो यह भी जाता है कि यह महाभारत काल से पूर्व बना था।

यह भी माना जाता है कि हुमायूं की राजधानी दिन पनाह भी यहीं स्थित थी जिसे बाद में भारत के प्रथम अफगान शासक द्वारा जीर्णोद्धार करके शेरगढ़ नाम दिया गया। इसके साथ ही भारत के अन्तिम हिन्दू शासक सम्राट हेम चन्द्र विक्रमादित्य उर्फ हेमू द्वारा सन् 1556 ईस्वी में अकबर की सेनाओं को दिल्ली और आगरा में परास्त करने के बाद उनका राजतिलक इसी महल में हुआ था।

एएसआइ के मुताबिक, खोदाई के दौरान 1960 में पुराना किले के बाहरी हिस्से से कुछ खपरे-सी चीजें मिली थीं, जो महाभारत काल के बारे में कुछ खास नहीं बता पा रही थीं, लेकिन बाद में भी कई बार खोदाई की गई है।

वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि महाभारत का संबंध पेंटेंड ग्रे वेअर (लौहयुगीन संस्कृति) से है, जो 1200 ईसापूर्व से 600 ईसापूर्व के बीच का माना जाता है। एक अन्य अधिकारी के मुताबिक,  यहां पर मौर्यकालीन अवशेष मिले हैं, इसके सबूत हमारे पास हैं, लेकिन हम यह जानने की कोशिश में जुटे हैं कि क्या उससे पहले भी यहां जीवन था।

पुराना किला झील का होगा कायाकल्प

मथुरा रोड स्थित ऐतिहासिक पुराने किले की झील में जल्द ही एक बार फिर पर्यटक नौका विहार का आनंद ले सकेंगे। दिल्ली टूरिज्म एंड ट्रांसपोर्टेशन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (डीटीटीडीसी) के साथ करार खत्म होने के बाद अब झील का कायाकल्प करने की एनबीसीसी (नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन) ने योजना बनाई है। एनबीसीसी ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के साथ करार किया है जिसके तहत झील की दशा सुधारने के साथ-साथ झील के आसपास का इलाका भी एनबीसीसी ही विकसित कराएगा।

योजना के तहत झील में पंप से पानी उपलब्ध कराया जाएगा। नौकायन के लिए नई तरह की नाव उपलब्ध कराई जाएंगी। यह बच्चों को आकर्षित करेंगी। झील के पास ही एक फूड कोर्ट होगा। वाहनों के लिए पार्किंग की भी व्यवस्था की जाएगी। पुराना किला के बाहर स्थित टिकट काउंटर को भी सुंदर बनाया जाएगा। झील के चारों ओर के इलाके को पक्का बनाया जाएगा। पर्यटकों के बैठने के लिए जगह-जगह बेंच लगाई जाएंगी, जो ईको फ्रेंडली होंगी। झील में स्वच्छ पानी उपलब्ध होगा। इस पानी की सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। झील के चारों ओर लोहे की ऊंची रेलिंग लगाई जाएगी। झील और इसके आसपास के इलाके को इस तरह विकसित किया जाएगा कि लोग यहां के लिए आकर्षित होंगे।

पुराना किला के निर्माण के समय ही यहा पर एक कृत्रिम झील बनाई गई थी। इसमें यमुना नदी से पानी भरा जाता था। समय गुजरने के साथ यमुना नदी किले से कई मीटर दूर चली गई। इसके बाद झील में बोरिंग के माध्यम से पानी भरा जाने लगा।

एएसआइ के एक अधिकारी ने बताया कि पहले पर्यटन विभाग इसकी देखरेख करता था। पिछले साल पर्यटन विभाग के साथ किया गया करार खत्म हो गया था। जिसके बाद इस झील की सफाई की गई है। गाद निकालने के बाद इसमें पानी भरा गया है। आसपास की सड़कों का पानी झील में आए इसके लिए भी इंतजाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थान पर्यटन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। झील में नौकायन की तैयारी चल रही है। एनबीसीसी इस योजना पर काम कर रहा है।

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