मुस्लिम महिला सम्मेलन में बालिका शिक्षा पर विशेष जोरमुस्लिम महिला सम्मेलन में बालिका शिक्षा पर विशेष जोर

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मुस्लिम महिला सम्मेलन में बालिका शिक्षा पर विशेष जोर

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मुस्लिम महिला सम्मेलन
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मुस्लिम महिला सम्मेलन में कनिज फातिमा की प्रभावशाली तकरीर से उमड़ा महिलाओं का सैलाब

जोधपुर, 11 फरवरी 2026। उदय मंदिर कर्बला कॉलोनी स्थित मदरसा गौसिया में मुस्लिम घोसी समाज, जोधपुर की मेजबानी में एक दिवसीय औरतों का सुन्नतों भरा इज्तिमा (मुस्लिम महिला सम्मेलन) भव्य रूप से आयोजित किया गया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

मुख्य अतिथि प्रख्यात इस्लामी आलिमा कनिज फातिमा (मुरादाबाद) ने अपने संबोधन में कहा कि इस्लाम धर्म में महिलाओं को दीन और दुनिया दोनों की उच्च शिक्षा प्राप्त करने की पूरी इजाजत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा से जीवन उज्ज्वल होता है, इसके बिना जीवन अंधकारमय है। इस्लामी दृष्टिकोण से शुद्धता (पाकी) पर जोर देते हुए उन्होंने पैगंबर-ए-इस्लाम के कथन का उल्लेख किया कि “पाकी आधा ईमान है”, इसलिए हर व्यक्ति को सदैव पाक-साफ रहना चाहिए।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रसिद्ध आलिमा नाहिद फातिमा ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा बालक-बालिकाओं दोनों के लिए न केवल आवश्यक है, बल्कि यह उनका फर्ज भी है। उन्होंने कहा कि हमारे नबी-ए-पाक का फरमान है कि मां की गोद से लेकर कब्र तक इल्म हासिल करना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से अपने बच्चों और बच्चियों को दीनी व दुनियावी शिक्षा दिलाने का आह्वान किया और निरक्षरता को अभिशाप बताया।

सम्मेलन में इस्लामी आलिमाओं द्वारा महिलाओं को इस्लामी शरीयत की रोशनी में गुस्ल, वजू तथा नमाज की सभी अरकान के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। पर्दे के पीछे से मुफ्ती-ए-आज़म राजस्थान के प्रतिनिधि मौलाना जलाल खान साहब ने कहा कि पढ़ी-लिखी महिला घर का चिराग होती है, जिसकी रोशनी से पूरा खानदान रोशन होता है। सम्मेलन में बालिका शिक्षा पर विशेष रूप से जोर दिया गया। इस अवसर पर मदरसे के पूर्व कोषाध्यक्ष मरहूम अहमद हुसैन साहब को याद करते हुए उनके लिए मगफिरत और दर्जात की बुलंदी की दुआएं की गईं।

कार्यक्रम का शुभारंभ जोहर की नमाज के बाद मुमताज बानो की तिलावत-ए-कुरान से हुआ, इसके पश्चात शहनाज बानो ने नात शरीफ पेश की। अतिथियों का स्वागत रेहमत बानो व इक़रा बानो द्वारा फूल मालाएं पहनाकर किया गया। कार्यक्रम के अंत में सलातो-सलाम पढ़ा गया तथा देश में अमन, शांति, भाईचारा, खुशहाली और तरक्की की दुआओं के साथ शाम 5 बजे ऐतिहासिक इज्तिमा संपन्न हुआ।

अंत में कार्यक्रम संयोजक मोहम्मद अयूब ने सफल आयोजन के लिए अब्दुल रज्जाक, अब्दुल कय्यूम, इंसाफ अली, हाजी मोहम्मद, हाजी अब्दुल शकूर, हाजी कमरुद्दीन, अब्दुल गनी, भाभा भाई अब्दुल शकूर, मोहम्मद छोटू, सिकंदर मोयल, अब्दुल सलीम, मोहम्मद उस्मान, मोहम्मद यूसुफ, मोहम्मद हुसैन, अब्दुल जब्बार, शमसुद्दीन सहित सभी कार्यकर्ताओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

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