कृषि अनुसंधान केंद्र में एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण-सह-आदान वितरण कार्यक्रम का आयोजन
जोधपुर । कृषि विश्वविद्यालय के डॉ. बी.आर. चौधरी कृषि अनुसंधान केंद्र, मंडोर की ओर से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद , आईसीएआर, की अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (एआईसीआरपी)–तिल एवं रामतिल के अंतर्गत जनजातीय उपयोजना कार्यक्रम के तहत ग्राम सियावा, जिला सिरोही में “उन्नत तिल किस्मों एवं वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों द्वारा अधिक उपज एवं किसान आय संवर्धन” विषय पर एक दिवसीय ‘कृषक प्रशिक्षण-सह-आदान वितरण’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 25 जनजातीय कृषकों ने भाग लिया।
-कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित कृषकों को तिल की उन्नत किस्म आरटी-372 के बीज के साथ-साथ खरपतवारनाशी, कार्बेन्डाजिम तथा अन्य आवश्यक कृषि आदानों का वितरण किया गया। इन आदानों का उपयोग किसानों के खेतों पर अग्रिम पंक्ति प्रदर्शनों (FLDs) के माध्यम से तिल की उन्नत उत्पादन तकनीकों के प्रदर्शन हेतु किया जाएगा, जिससे उत्पादकता एवं कृषक आय में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।
-प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को तिल की उन्नत एवं उच्च उत्पादक किस्मों के साथ-साथ वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों की जानकारी प्रदान करना था। कार्यक्रम में डॉ. राकेश चौधरी, सहायक प्रोफेसर (शस्य विज्ञान) ने किसानों को बीजोपचार, समय पर बुवाई, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण, कीट एवं रोग प्रबंधन, जल संरक्षण उपायों तथा कटाई-पश्चात प्रबंधन संबंधी वैज्ञानिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने जलवायु परिवर्तन एवं अनिश्चित वर्षा की परिस्थितियों में तिल उत्पादन बढ़ाने हेतु अपनाई जाने वाली नवीन तकनीकों पर भी प्रकाश डाला।
उन्नत किस्मों हेतु किया प्रेरित
इस अवसर पर डॉ. विजय कमल मीणा, सहायक प्रोफेसर (आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन) ने किसानों को तिल की उन्नत एवं उच्च उपज देने वाली किस्मों की विशेषताओं से अवगत कराया तथा अनुसंधान आधारित कृषि तकनीकों को अपनाकर उत्पादन एवं आय बढ़ाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में दुर्गाशंकर मीणा, तकनीकी सहायक तथा प्रगतिशील कृषक श्री गेणा राम भी उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने के लाभों पर प्रकाश डाला तथा किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
वैज्ञानिकों से की चर्चा
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने तिल उत्पादन से संबंधित विभिन्न समस्याओं एवं चुनौतियों पर वैज्ञानिकों से चर्चा की तथा उनके समाधान प्राप्त किए। अंत में किसानों से प्राप्त सुझावों एवं फीडबैक पर विचार-विमर्श किया गया तथा उन्हें उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने एवं अन्य किसानों तक इन तकनीकों का प्रसार करने के लिए प्रेरित किया गया।
