
जोधपुर। भीषण गर्मी के दौर में जहां अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों के लिए पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था होना जरूरी है, वहीं जोधपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल मथुरादास माथुर (एमडीएम) अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। विभाग में लगे वाटर कूलर लंबे समय से बंद पड़े हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
तापमान 40 डिग्री से ऊपर पहुंचने के बीच अस्पताल में रोजाना सैकड़ों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। न्यूरोलॉजी विभाग में भर्ती मरीजों के परिजन पानी की व्यवस्था नहीं होने से खासे परेशान हैं। कई लोगों का कहना है कि उन्हें दूर-दूर तक पानी की तलाश करनी पड़ रही है, जबकि अस्पताल प्रशासन इस समस्या से बेखबर नजर आ रहा है।
एमडीएम अस्पताल पश्चिमी राजस्थान के लाखों लोगों के लिए प्रमुख चिकित्सा केंद्र माना जाता है और यहां आसपास के कई जिलों से मरीज उपचार के लिए आते हैं।
मरीजों के परिजनों का आरोप है कि गर्मी में पानी जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करता है। लोगों ने अस्पताल प्रशासन और जिला प्रशासन से तत्काल बंद पड़े वाटर कूलरों को चालू करवाने तथा अतिरिक्त पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
अब सवाल यह है कि जब मरीजों की सुविधा के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तब भी अस्पताल में पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा क्यों नहीं मिल पा रही? भीषण गर्मी में प्यास से परेशान मरीजों और उनके परिजनों की सुध आखिर कौन लेगा?
